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Sunday, 27 August 2017

Mrityunjay Singh: India's Youngest CEO biography in Hindi - Founder VihanApp ,VGM Lite

आज हम आपको मिलवायेंगे दुनिया के YOUNGEST CEO से। CEO (Chief Executive Officer) यानि किसी company का सबसे प्रमुख अधिकारी, कहने की बात नहीं है कि यह एक बहुत ही जिम्मेदारी भरा पद है और इस पद तक पहुचते-पहुँचते बाल सफ़ेद हो जाते हैं।
"भरोसा खुद पर रखो तो ताकत का एहसास कराता है यदि उसी भरोसे को आप दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाता है।

इसी पर आधारित आज की हमारी कहानी Cyber Security से पास मृत्युंजय सिंह की जिन्होंने लोगों को दिखा दिया कि अगर इंटरेस्ट और करने की चाह होती है। तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है ऐसी ही सोच रखने वाले मृत्युंजय सिंह ने अपनी सक्सेसफुल जॉब को छोड़कर उस फील्ड में कदम रखा जिसका उन्हें बिल्कुल भी अनुभव नहीं था। उस फील्ड में मृत्युंजय ने अपनी सफलता के ऐसे झंडे गाड़े कि आज उन्हें सक्सेसफुल बिजनेसमैन की लिस्ट में लाकर खड़ा कर दिया। आज उनकी कंपनी VihanApp Messenger करोड़ का बिजनेस करती है जो अपने आप में एक दिलचस्प बात है। तो चलिए जानते हैं- मृत्युंजय सिंह के बारे में उन्होंने कैसी खड़ी कर दी  करोड़ टर्नओवर करने वाली कंपनी।"
जब पहली बार मेरे मन में ये सवाल आया कि भला दुनिया का सबसे कम उम्र वाला CEO कौन होगा, तो मैंने सोचा जरूर ये कोई American होगा, जिसने बीच में ही अपनी पढाई छोड़ कर किसी गराज से कोई IT कंपनी शुरी की होगी। कोई Bill GatesSteve Jobs types. पर मेरे लिए ये एक बेहद सुखद आश्चर्य था कि World’s Youngest And Smallest CEO कोई और नहीं बल्कि एक भारतीय है।

Name - Mrityunjay Singh( Founder And CEO VihanApp , VGM Lite )
DOB - 26/01/1997Father Name - Yogendra Kumar SinghMother Name - Pratibha Singh


आज से करीब 1 साल पहले जब मृत्युंजय सिंह ने VihanApp नाम की foundation डाली थी तो वो महज 19 वर्ष के थे,और तब उन्हें खुद भी नहीं पता था कि वो दुनिया के सबसे कम उम्र के CEO बन गए हैं। और ये काम उन्होंने किसी आलिशान office में बैठ के नहीं बल्कि Varanasi के एक छोटे से Cyber-Cafe में बैठ कर किया था।
आज Cobra Group Pvt. Ltd. ( VihanApp And VGM Lite ) एक multi-million dollar company है और इसके operations India ,  USA, UK, Spain, Australia, इत्यादि देशों में फैले हुए हैं। मात्र 20 वर्ष की अवस्था में, जब ज्यादातर  लोग अपनी पढाई पूरी करने में ही लगे होते हैं; तभी Mrityunjay Singh ने अनेकों उपलब्धियां हांसिल कर रखी हैं –
1- Mrityunjay Singh is also a ethical hacker and its also working in police department.
मृत्युंजय सिंह का बचपन:
मैं एक मध्यम-वर्गीय परिवार से belong करता हूँ। मेरे पिता Former थे। और मैं उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के एक छोटे से गांव में पढ़ता था। बचपन में मेरा Computer , internet and interest animal और veterinary science में था। लेकिन जब मैं अपने दोस्तों जिनके पास PC था; को कंप्यूटर के बारे में बात करते सुनता था तो मेरे अंदर भी एक चाहत उत्पन्न हुई कि मैं भी उनकी तरह बात करूँ।
उस वक्त हमारे घर पे computer नहीं था और न ही हम उसे afford कर सकते थे। इसलिए मैंने अपने घर के नजदीक ही एक Internet Cafe find किया, तब मुझे हर महीने सिर्फ 15 रूपए बतौर pocket money मिलते थे, इतने पैसों में रोज internet नहीं surf किया जा सकता था। लेकिन मैंने इस दुकान के बारे में एक चीज notice की थी, ये हर रोज दोपहर में 1 बजे से 4 बजे तक बंद रहती थी। मैंने दुकानदार को एक offer दिया कि school के बाद 1 बजे से 4 बजे तक मैं आपकी दुकान खोलूँगा और customers का ध्यान रखूंगा। बदले में आप मुझे free में net surf करने देंगे। ये मेरी life की पहली business deal थी, और ये काफी सफल साबित हुई।
जब अपना पहला computer खरीदा:

जब मैं 9th class में था तभी मैंने computer खरीदने के लिहाज से काफी पैसे जमा कर लिये थे। उस समय मेरा भाई Art की पढ़ाई कर रहा था, पापा ने सोचा उसे कंप्यूटर की ज़रूरत है और उसके लिए कंप्यूटर खरीद दिया, कुछ ही समय में मैंने भी एक कंप्यूटर खरीद लिया। पर मेरे घर पे net-connection नहीं था। Net-cafe में ज्यादा समय देने से मेरी पढाई भी प्रभावित हुई। मैंने 9th के बाद अपनी सारी summer vacation cafe में काम करते हुए बिताई।

जॉब से VihanApp And VGM Lite के CEO बनने तक का सफर -


मैंने सोचा अपनी कंपनी शुरू करने में ज्यादा मजा है।इसलिए मैंने अपनी कंपनी शुरू करने कि सोची ताकि मैं दुनिया को दिखा सकूं कि age और academic qualification मायने नहीं रखते हैं। मैंने निश्चय किया कि जब मैं अपनी कंपनी start करूँगा तो मैं सिर्फ youngsters को लूँगा और उनसे उनकी academic qualification या marks के बारे में नहीं पूछूँगा। आज मैं इस चीज को अपनी कंपनी में follow करता हूँ।


मृत्युंजय सिंह ने बचपन से ही कंप्यूटर में रुचि लेने लग गए थे। लेकिन मृत्युंजय सिंह की बचपन की सबसे खास बात यह थी कि वह कंप्यूटर में गेम खेलने या कुछ भी एंटरटेनिंग वीडियो देखने के बजाए कुछ इंटरेस्टिंग सीखना प्रोग्रामिंग करने को वरीयता और दिलचस्पी दिखा रहे थे।
इसी दिलचस्पी की बदौलत अन्य बच्चे जिस उम्र में कंप्यूटर पर गेम खेलने में रूचि दिखाते हैं। वही मृत्युंजय महज 15 साल की उम्र में ही प्रोग्रामिंग करने लग गए थे। मृत्युंजय का स्कूल पूरा होते-होते मृत्युंजय प्रोग्रामिंग में माहिर हो चुके थे।
मृत्युंजय ने अपनी स्कूली पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद उन्होंने रायपुर हैकिंग में एडमिशन लिया। लेकिन उनके पेरेंट्स उनसे सब्जेक्ट  हैकिंग से खुश नहीं थे। वह मृत्युंजय को उनके इंटरेस्ट के अकॉर्डिंग कंप्यूटर साइंस दिलाना चाहते थे। इसी दौरान पारस ने अपने इंटरेस्ट यानी कि प्रोग्रामिंग में काफी सुधार किए।
कॉलेज के समय में मृत्युंजय अपनी स्किल्स का उपयोग करके मॉडल तैयार करने में किया करते थे। वह इस चीज में इतने माहिर हो गए थे कि वह अपने क्लासमेट और मित्रों के लिए मॉडल बना दिया करते थे। इस काम ने मृत्युंजय को Andriod और ecommec के प्रति आकर्षित किया।
एक बार कॉलेज के दिनों में मृत्युंजय ने how to make own start up पर एक आर्टिकल पड़ा। तब उनके जहन में स्टार्टअप करने की तीव्र इच्छा हुई। इसी के चलते मृत्युंजय ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान 3 4 startup मैं भी हाथ आजमाया। लेकिन तब business experience के अभाव से यह startup business मैं तब्दील नहीं हो सके। लेकिन इन startup के चलते मृत्युंजय को काफी कुछ सीखने का मौका मिला जो आगे चलकर उनके बहुत काम आने वाला था।
वैसे अगर देखा जाए तो मृत्युंजय का बिना अनुभव के इस फील्ड में उतरना एक जोखिम भरा फैसला था। लेकिन कुछ अच्छा करने के लिए हर इंसान को कभी न कभी तो रिस्क लेना ही पड़ता है। ठीक ऐसा ही मृत्युंजय ने किया। मृत्युंजय को खुद पर भरोसा था कि वह कुछ बेहतर कर सकते हैं। इसी के चलते उन्होंने बहुत सारी बुक्स और इंटरनेट से जानकारियां कलेक्ट की और मृत्युंजय ने जॉब के साथ ही इस पर काम करना भी शुरू कर दिया। मृत्युंजय का मकसद E-commerce , Digital Payment And Messeging के लिए एक प्लेटफार्म तैयार करने का था जिसके द्वारा यूजर अपनी Skill को और बेहतर बनाने के लिए यूज कर सकें।
करीब 5 महीने की कड़ी मेहनत के बाद मृत्युंजय एक अच्छे और कई फीचर वाले product बनाने में कामयाब हो गए। और 2016 में VihanApp messenger नाम के इस Application को लॉन्च किया।
मृत्युंजय की सैलरी और  अपने पापा से 1800 रुपये कर्ज से शुरू हुई इस कंपनी ने कुछ ही महीने बाद ही अच्छा टर्नओवर करना स्टार्ट कर दिया। कंपनी के अच्छा बिजनेस करते हुए देख मृत्युंजय ने अपनी जॉब को छोड़ते हुए अपना पूरा ध्यान और समय इस कंपनी को देना शुरू कर दिया। इसी के चलते जनवरी 2017 तक मृत्युंजय की कंपनी VihanApp messenger का टर्नओवर 20 लाख तक का हो गया। जो आज करीब  करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है। यह टर्नओवर मृत्युंजय की कंपनी के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
इनका यह आइडिया बेहद कारगर साबित हुआ और कुछ ही दिनों में वे हर महीने एक से दो लाख रुपए की कमाई करने लगे। शुरूआती सफलता के बाद मृत्युन्जय सिंह  ने इसे देश भर में फैलाने का फैसला किया। उस वक़्त और भी दुसरे एप्प थे लेकिन विहानऐप्प  के बेहतर फीचर्स ने लोगों को आकर्षित करते हुए 1 साल के भीतर ही अन्य एप्प  को पछाड़कर आगे निकल गया। हालांकि अभी भी व्हाट्सअप चालान में है ।  धीरे-धीरे निवेशकों और ग्राहकों को लुभाते हुए कंपनी का वैल्यूएशन करोड़ रुपए के पार हो गया।
विहानऐप्प को दूसरे देशों में भी पसंद किया जाने लगा |

World Smallest Browser VGM Lite Les Then 1 MB Made Bye Mrityunjay Singh

मृत्युंजय सिंह ने दुनिया का सबसे छोटा ब्राउज़र बनाया जिसका नाम उन्होंने वीजीएम ब्राउज़र( VGM Lite ) दिया . यह ब्राउज़र मात्र 600 केबी का है . इस ब्राउज़र को खास तौर पे धीमी नेट पे भी चलने के लिए बनाया गया है इस ब्राउज़र ने UC ब्राउज़र और ओपेरा मिनी ादी कंपनी को टक्कर देने के लिए बनाया गया है

Mrityunjay Singh Say's - " Success Does Not Matter Education "

जब 20 साल की उम्र में अपनी company start की : Class 12th की छुट्टियाँ खत्म होने के कुछ दिन बाद ही मैंने अपनी कंपनी Cobra Online Services Pvt. Ltd. की शुरुआत की। मैं कंपनी का नाम Cobra Group And Cobra Group Of Company रखना चाहता था, पर दोनों ही नाम available नहीं थे, इसलिए मैंने   Cobra Online Services Pvt. Ltd नाम रख लिया।


पहले साल में Cobra Group Pvt. Ltd का turn-over Rs. 1 lac था,जो दुसरे साल में बढ़कर Rs. 9 Lacs हो गया।

स्कूल में अच्छा ना करने पर:
अपने pre-board CBSE exam में मैं Mathematics में fail हो गया। स्कूल की हेड-मिस्ट्रेस shocked हो गयीं, क्योंकि पहली बार मैं किसी subject में fail हुआ था। उन्होंने मेरी माँ को बुलाया और मेरी शिकायत की। घर पे माँ ने मुझसे कसम ली की मैं पढाई पे ध्यान दूँगा। मैंने अपनी माँ से कहा कि जब दुनिया के सबसे अमीर आदमी, Bill Gates ने अपनी पढाई पूरी नहीं की तो आप मुझे पढाई के लिए force क्यों करती हैं? तब उन्होंने कहा कि मैं sure हूँ कि तुम्हारी और उसकी कुंडली एक जैसी नहीं है। 🙂
मैं एक ऐसे परिवार से हूँ जहाँ entrepreneurship को पाप समझा जाता है। मेरी माँ काफी upset थीं, वो चाहती थीं कि मैं पहले Engineering और फिर MBA करके किसी अच्छी कंपनी में काम करूं। अपनी माँ कि इच्छाओं का ख़याल रखते हुए मैंने चार महीने तक अपनी कंपनी के लिए कोई काम नहीं किया और board exams की तैयारी में जुट गया। मैंने परीक्षाएं first class में पास कीं।
"मैं अभी भी feel करता हूँ कि सिर्फ bookish knowledge से कुछ नहीं होता, practical knowledge बहुत जरूरी है।"
VihanApp messenger जल्द ही स्नैपडील, फ्लिपकार्ट को ठक्कर देने के लिए अपने नये वर्जन ला रहा जिसमे हम घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग कर सकेंगे औऱ साथ ही पेटियम और मेक माय ट्रिप व् बुक माय शो को भी ठक्कर देने के लिए अपनी खुद की सिस्टम ला रहा VihanApp messenger के नए फ़ीचर में ।  VihanApp messenger मे जल्द ही मैसेजिंग ( ऑडियो औऱ वीडियो कॉलिंग ) के साथ साथ शॉपिंग , बुकिंग ( होटल , कैब , कार , बस , ट्रेन , फ्लाइट , मूवी टिकट आदि ) , बिल पेयमेंट , रिचार्ज औऱ साथ ही साथ कैशलेश पेमेंट भी कर सकेंगे । और इसी के साथ VihanApp messenger दुनिया का पहला ऐसा मैसेजिंग ऐप्प होगा जो चैटिंग के साथ ये सब फ़ीचर देगा । VihanApp messenger अभी सिर्फ एंड्राएड ऊजर के लिए तैयार है जल्द ये सभी OS में उपलब्ध होगा । 
VihanApp messenger मे चैटिंग के लिए बहुत अच्छे अच्छे फ़ीचर दिए गए हैं जो भविष्य में बहुत कारगर साबित होंगे।







Saturday, 26 August 2017

लक्ष्मी मित्तल Lakshmi Niwas Mittal Biography in Hindi

लक्ष्मी मित्तल


जन्म: 15 जून 1950, शादूलपुर, चूरु, राजस्थान
आवास: लंदन, ग्रेट ब्रिटेन
कार्यक्षेत्र: भारतीय उद्योगपति, आर्सेलर मित्तल के सीईओ और चेयरमैन
लक्ष्मी मित्तल एक भारतीय उद्योगपति और दुनिया के सबसे बड़े स्टील उत्पादक कंपनी आर्सेलर मित्तल के सीईओ और चेयरमैन हैं। हालांकि वे यूनाइटेड किंगडम में रहते हैं पर उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं छोड़ी है। वे भारत के साथ-साथ दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं। पेशेवर इंग्लिश फुटबाल क्लब ‘क्वींस पार्क रेंजर्स फुटबाल क्लब’ में उनकी 33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सन 2007 में उन्हें यूरोप का सबसे अमीर हिन्दू और एशियन माना गया। सन 2002 में ब्रिटेन के आठवें नंबर का सबसे अमीर व्यक्ति होने के बावजूद वे ब्रिटिश नागरिक नहीं हैं। सन 2011 में फोर्ब्स ने उन्हें विश्व का छठा सबसे अमीर व्यक्ति माना था पर मार्च 2015 में वे बहुत नीचे गिरकर 82वें नंबर पर आ गए।
सन 2008 से लेकर वे गोल्डमैन सैक्स के ‘बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स’ के सदस्य हैं। वे ‘विश्व स्टील संगठन’ के कार्यकारी समिति, भारतीय प्रधानमंत्री के ‘वैश्विक सलाहकार समिति’, कज़ाकिस्तान के ‘फॉरेन इन्वेस्टमेंट कौंसिल’, ‘वर्ल्ड इकनोमिक फोरम’ के अन्तराष्ट्रीय व्यापार समिति, और मोजांबिक के राष्ट्रपति के अन्तराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं। वे अमेरिका स्थित केल्लोग्स स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट के सलाहकार बोर्ड और ‘क्लीवलैंड क्लिनिक’ के ‘बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज’ के सदस्य हैं।
सन 2006 में ‘द सन्डे टाइम्स’ ने उन्हें ‘बिज़नस पर्सन ऑफ़ 2006’, ‘द फाइनेंसियल टाइम्स’ ने उन्हें ‘पर्सन ऑफ़ द इयर’ और ‘टाइम’ पत्रिका ने उन्हें ‘इंटरनेशनल न्यूज़मेकर ऑफ़ द इयर 2006’ का सम्मान दिया। सन 2007 में ‘टाइम’ पत्रिका ने उन्हें ‘दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों’ की सूची में रखा।
प्रारंभिक जीवन
लक्ष्मी निवास मित्तल का जन्म 2 सितंबर, 1950 को राजस्थान के चुरू जिले की राजगढ़ तहसील में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहन लाल मित्तल था। लक्ष्मी संयुक्त परिवार में पैदा हुए थे और बाद में उनका परिवार कोलकाता चला गया। उनके के दो भाई हैं – प्रमोद मित्तल और विनोद मित्तल।
लक्ष्मी निवास मित्तल ने सन 1957 से 1964 तक श्री दौलतराम नोपानी विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने कोलकाता के सेंट जेविएर्स कॉलेज (कोलकाता विश्वविद्यालय से सम्बद्ध) से वाणिज्य में बिजनेस ऐंड अकाउंटिंग में गैजुएशन की। उनके पिता मोहन लाल मित्तल का इस्पात का व्यवसाय था – निप्पन डेनरो इस्पात।
उद्योग जगत में कदम
भारत सरकार द्वारा स्टील के उत्पादन पर नियंत्रण के वजह से 26-वर्षीय लक्ष्मी निवास मित्तल ने सन 1976 में अपना पहला स्टील कारखाना ‘पी.टी. इस्पात इंडो’ इंडोनेशिया के सिदोअर्जो में स्थापित किया। 1990 के दशक तक भारत में मित्तल परिवार के परिसंपत्ति के रूप में नागपुर में शीट स्टील्स की एक कोल्ड रोलिंग मिल और पुणे के पास एक एलाय स्टील संयन्त्र था। आज के समय में भारत में मित्तल परिवार का व्यवसाय (जिसमें मुंबई के पास एक विशाल इंटीग्रेटेड स्टील संयन्त्र शामिल है) विनोद और प्रमोद मित्तल चलाते हैं पर लक्ष्मी का इन व्यवसायों से कोई लेना-देना नहीं है।
मार्च 2008 में फोर्ब्स मैगजीन ने लक्ष्मी मित्तल को दुनिया के चौथे सबसे धनी शख्स का खिताब दिया। लक्ष्मी एशिया के सबसे धनी इंसान बताए गए।
वर्तमान में लक्ष्मी मित्तल आर्सेलर मित्तल स्टील कंपनी के सीईओ और चेयरमैन हैं। इसके अलावा वह ईएडीएस, आईसीआईसीआई बैंक और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी गोल्डमैन सैक्स के गैर-कार्यकारी निदेशक भी हैं। सन 2008 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
लोकोपकारी कार्य
नवम्बर 2003 में उन्होंने प्रतिभावान भारतीय खिलाडियों के आर्थिक मदद और प्रोत्साहन के लिए ‘मित्तल चैंपियंस ट्रस्ट’ की स्थापना की। सन 2008 में जब अभिनव बिंद्रा ने भारत के लिए ओलंपिक्स में स्वर्ण पदक जीता तब इस ट्रस्ट से 1.5 करोड़ रूपए पुरस्कार के रूप में दिए गए। सन 2012 के लन्दन ओलंपिक्स में उनकी कंपनी ‘आर्सेलर मित्तल’ ने ‘आर्सेलर मित्तल ऑर्बिट’ का निर्माण करवाया था।
शिक्षा के क्षेत्र में
सन 2003 में लक्ष्मी निवास मित्तल और उषा मित्तल फाउंडेशन ने राजस्थान सरकार के साथ मिलकर जयपुर में ‘एल.एन.एम. इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी’ की स्थापना की। यह एक स्वायत्त और लाभ-निरपेक्ष संस्थान है।
लक्ष्मी निवास मित्तल फाउंडेशन ने एस.एन.डी.टी. विमेंस यूनिवर्सिटी के ‘इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी फॉर वीमेन’ को चंदे में एक बड़ी धन-राशि दी जिसके बाद संस्थान का नाम बदलकर ‘उषा मित्तल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी’ कर दिया गया।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में
सन 2008 में मित्तल ने लन्दन स्थित ‘ग्रेट ओरमोंड स्ट्रीट हॉस्पिटल’ को लगभग डेढ़ करोड़ ब्रिटिश पौंड का चंदा दिया। इस चंदे से अस्पताल में एक नए स्वास्थ्य सुविधा केंद्र की स्थापना हुई – मित्तल चिल्ड्रेन्स मेडिकल सेण्टर।
क्वींस पार्क रेंजर्स
मित्तल परिवार की प्रोफेशनल इंग्लिश फुटबॉल क्लब ‘क्वींस पार्क रेंजर्स एफ.सी.’ में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह निवेश मित्तल के दामाद अमित भाटिया के देख-रेख में हुआ था।
निजी जीवन
लक्ष्मी मित्तल का वर्तमान निवास लन्दन स्थित 18-19 केनिंग्सटन पैलेस गार्डन्स है। यह संपत्ति उन्होंने फार्मूला वन के मालिक बर्नी एक्लेस्टोन से सन 2004 में लगभग 12 करोड़ 80 लाख अमेरिकी डॉलर में ख़रीदा था। अपने समय में यह दुनिया का सबसे महंगा मकान था। इस घर को सजाने में उसी खदान के संगमरमर का प्रयोग हुआ है जहाँ से ताज महल बनाने के लिए संगमरमर लाया गया था।
सन 2008 में उन्होंने अपनी पुत्री वनीशा के विवाह में भी लन्दन स्थित एक मकान उपहार में दिया जिसकी कीमत थी लगभग 7 करोड़ ब्रिटिश पौण्ड।
सन 2005 में उन्होंने भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित ए.पी.जे.अब्दुल कलाम मार्ग पर एक संपत्ति खरीदी जिसकी कीमत थी 3 करोड़ अमरीकी डॉलर।
सम्मान और पुरस्कार
  • 2008: फोर्ब्स पत्रिका द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार दिया गया
  • 2007: किंग्स कॉलेज लन्दन द्वारा फ़ेलोशिप प्रदान की गई
  • 2004: फ़ोर्ब्स पत्रिका द्वारा ‘यूरोपियन बिजनेसमैन ऑफ़ द इयर’
  • 2004: वाल स्ट्रीट जर्नल द्वारा ‘इंटरप्रेन्योर ऑफ़ द इयर’ चुने गए
  • 2004: अमेरिकन मेटल मार्किट एंड वर्ल्ड स्टील डायनामिक्स द्वारा ‘आठवां विल्ली कोर्फ स्टील विज़न (मानद) अवार्ड दिया गया
  • 1996: न्यू स्टील द्वारा ‘स्टील मकर ऑफ़ द इयर’ 
टाइम लाइन (जीवन घटनाक्रम)
  • 1950: 15 जून को शादूलपुर, चूरु, राजस्थान में जन्म हुआ
  • 1957-64: श्री दौलतराम नोपानी विद्यालय से शिक्षा ग्रहण किया
  • 1976: अपना पहला स्टील कारखाना ‘पी.टी. इस्पात इंडो’ इंडोनेशिया के सिदोअर्जो में स्थापित किया
  • 2008: फोर्ब्स मैगजीन ने लक्ष्मी मित्तल को दुनिया के चौथे सबसे धनी व्यक्ति का खिताब दिया
  • 2008: भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया

मुकेश अंबानी - Mukesh Ambani Biography in Hindi

जन्म: 19 अप्रैल, 1957, अदेन, यमन
कार्यक्षेत्र: उद्योगपति, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष
मुकेश अंबानी एक भारतीय उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक हैं। अकूत निजी संपत्ति के मालिक, मुकेश भारत के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूचि में शामिल हैं। इसके साथ-साथ वे दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में भी शामिल हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी तथा फोर्च्यून 500 कंपनी है। वे दुनिया की सबसे महंगी ज़ायदाद मुंबई स्थित ‘एंटिल्ला’ में रहते हैं। मुकेश रिलायंस के संस्थापक स्वर्गीय धीरुभाई अम्बानी के पुत्र और ‘रिलायंस अनिल धीरुभाई अम्बानी ग्रुप’ के अध्यक्ष अनिल अम्बानी के बड़े भाई हैं। मुकेश के रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल, तेल, गैस और रिटेल जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है। उद्योग-धन्देहे के साथ-साथ वे इंडियन प्रीमियर लीग (आई.पी.एल.) के अंतर्गत आने वाली क्रिकेट टीम मुंबई इंडियन्स ट्वेंटी-ट्वेंटी टीम के भी मालिक हैं। सन 2012 में फोर्ब्स ने उन्हें ‘दुनिया के सबसे अमीर ‘स्पोर्ट्स ओनर्स’ की सूची में स्थान दिया। अपनी कंपनी के अलावा मुकेश अम्बानी अलाल्ग-अलग समय पर विभिन समितियों के सदस्य, अध्यक्ष तथा प्रतिष्ठित कंपनियों के बोर्ड पर भी रहे हैं। वे भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट बैंगलोर’ के बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
प्रारंभिक जीवन

मुकेश अम्बानी का जन्म 19 अप्रैल, 1957 में यमन स्थित अदेन शहर में धीरुभाई अम्बानी और कोकिलाबेन अम्बानी के घर हुआ था। उस समय उनके पिता अदेन में काम करते थे। मुकेश अम्बानी के छोटे भाई अनिल अम्बानी हैं और उनकी दो बहने भी हैं – दीप्ती सल्गओंकर और नीना कोठारी। 1970 के दशक तक मुकेश अम्बानी का परिवार मुंबई के भुलेश्वर में दो कमरों के मकान में रहता था पर उसका बाद धीरुभाई ने मुंबई के कोलाबा क्षेत्र में एक 14 मंजिल ईमारत (सी विंड) खरीद लिया जहाँ मुकेश और अम्बानी परिवार के अन्य सदस्य कई सालों तक रहे।
मुकेश की प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के पेद्दर रोड स्थित ‘हिल ग्रान्ज हाई स्कूल में हुई। यहाँ मुकेश के करीबी मित्र आनंद जैन उनके सहपाठी थे और इसी स्कूल में उनके छोटे भाई अनिल अम्बानी भी पढ़ते थे। मुकेश अम्बानी ने ‘इंस्टिट्यूट ऑफ़ केमिकल टेक्नोलॉजी, माटुंगा’ से केमिकल इंजीनियरिंग ऑफ़ बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग की डिग्री ग्रहण की। इसके पश्चात मुकेश ने एम.बी.ए. करने के लिए स्तान्फोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया पर एक साल बाद ही अपने पिता धीरुभाई अम्बानी की मदद करने के लिए पढ़ाई छोड़ दी।
करियर
सन 1980 में जब इंदिरा गाँधी सरकार ने पी.एफ.वाई. (पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न) का निर्माण निजी क्षेत्र के लिए खोला तब रिलायंस ने भी लाइसेंस के लिए अपनी दावेदारी पेश की और टाटा, बिड़ला तथा 43 और दिग्गजों के मध्य लाइसेंस पाने में कामयाबी हासिल की। पी.एफ.वाई. (पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न) कारखाने के निर्माण के लिए धीरुभाई अम्बानी ने मुकेश को एम.बी.ए. की पढ़ाई बीच में ही बुला लिया। मुकेश अपनी पढ़ाई छोड़ भारत आ गए और कारखाने के निर्माण में जुट गए।
मुकेश अम्बानी के नेतृत्व में ही रिलायंस ने भारत के सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में से एक ‘रिलायंस इन्फोकॉम लिमिटेड’ (अब रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड) की स्थापना की।
मुकेश ने जामनगर (गुजरात) में बुनियादी स्तर की विश्व की सबसे बड़ी पेट्रोलियम रिफायनरी की स्थापना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन 2010 में इस रिफायनरी की क्षमता 660,000 बैरल प्रति दिन थी यानी 3 करोड़ 30 लाख टन प्रति वर्ष। लगभग 100000 करोड़ रुपयों के निवेश से बनी इस रिफायनरी में पेट्रोकेमिकल, पावर जेनरेशन, पोर्ट तथा सम्बंधित आधारभूत ढांचा है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बार फिर ‘रिलायंस जिओ’ के माध्यम से दूरसंचार के क्षेत्र में कदम रखने जा रही है। इस बावत रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अनिल अम्बानी के रिलायंस कम्युनिकेशनन्स और सुनील मित्तल के एयरटेल के साथ उनके ढांचे के इस्तेमाल के लिए करार भी किया है। जून 2014 में रिलायंस के ए.जी.एम. के दौरान मुकेश ने अगले 3 साल में 4G सेवाएं प्रारंभ करने का एलान भी किया।
निजी जीवन
मुकेश अंबानी स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी और कोकिला बेन अम्बानी के पुत्र हैं। धीरूभाई अंबानी ने ही रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की थी। मुकेश के छोटे भाई अनिल अम्बानी रिलायंस अनिल “धीरूभाई अम्बानी” समूह (ADAG) के प्रमुख हैं। यह समूह दूरसंचार, बिजली, प्राकृतिक संसाधनों, बुनियादी सुविधाओं और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सक्रीय है। धीरुभाई अम्बानी के निधन के बाद दोनों भाईयों में नहीं बनी और कहा-सुनी हुयी, जिसके बाद रिलायंस समूह दो भागों में बंट गया।
मुकेश अम्बानी का विवाह नीता अम्बानी से हुआ। नीता रिलायंस इंडस्ट्रीज के सामाजिक एवं धर्मार्थ कार्यो को देखती हैं। उनके तीन बच्चे हैं – आकाश, ईशा और अनंत।
मुकेश अम्बानी के परिवार का सम्बन्ध गुजरात के मोध बनिया समुदाय से है।
मुकेश अम्बानी का निवास – एंटीलिया
मुकेश अम्बानी अपने परिवार के साथ दक्षिण मुंबई स्थित अपने 27 मंजिली ईमारत ‘एंटीलिया’ में रहते हैं। इसे दुनिया का सबसे महंगा मकान माना जाता है। लगभग 600 कर्मचारियों का दल इस ईमारत की देख-रेख में जूता रहता है। इसके नाम अटलांटिक ओसियन स्थित इसी नाम के एक पौराणिक टापू पर रखा गया है।
सम्मान और पुरस्कार
  • मुकेश अम्बानी को एन डी टी वी द्वारा साल 2007 का ‘बिज़नसमैंन ऑफ़ द ईयर चुने गया
  • यूनाईटेड स्टेटस-इंडिया बिज़नस कौंसिल (USIBC) ने वाशिंगटन में मुकेश अम्बानी को 2007 में “ग्लोबल विज़न” लीडरशिप अवार्ड दिया
  • नवम्बर 2004 में प्राईस वाटर हाउस कूपर्स द्वारा कराये गए एवं फाइनेंशियल टाइम्स लन्दन में प्रकाशित सर्वे में मुकेश अम्बानी को चार सीईओ में दूसरा स्थान मिला
  • अक्टूबर 2004 में टोटल टेलिकॉम ने दूरसंचार के क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर मुकेश अम्बानी को वर्ल्ड कम्युनिकेशन अवार्ड दिया
  • वौइस् एंड डाटा पत्रिका ने सितम्बर 2004 में उन्हें ‘टेलिकॉम मैंन ऑफ़ द ईयर’ चुना
  • फोर्च्यून पत्रिका के अगस्त 2004 अंक में सबसे शक्तिशाली कारोबारियों की एशिया पॉवर 25 सूचि में मुकेश को 13वां स्थान मिला
  • मई 2004 में एशिया सोसाइटी, वॉशिंगटन डी सी द्वारा उन्हें एशिया सोसाइटी लीडरशिप अवार्ड प्रदान किया गया
  • इंडिया टुडे के मार्च मई 2004 अंक में द पॉवर लिस्ट मई 2004 में मुकेश अम्बानी ने लगातार दूसरे साल पहला स्थान हासिल किया
  • सन 2007 में चित्रलेखा पर्सन ऑफ़ द ईयर -2007 पुरस्कार से सम्मानित किया गयाShare Your Story

Wednesday, 23 August 2017

Mark Zuckerberg Success Story In Hindi: World’s Youngest Co-Founder/Ceo Of Facebook


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Source: Fb Mark Zuckerberg Official Photo

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Success Journey And Biography In Hindi 

Hello Friends Aaj mein jo Success Story batane ja Raha hu wo ek aise Successfull Entrepreneur ki Story hai jinhone Harward University me hi apne friends, Room-mates Or Univesity ke kuch Members ke sath milkar Facebook ko Create kiye. aur Iss mukam tak Facebook ko laya yahi reason hai ki aaj hum sab Mark Zuckerberg ko Aachhi tarah se jante hai Aur aap sab bhi Mark Zuckerberg Facebook ke founder/ceo ko behatar tarike se jante honge. Ye kahna galat nhi hoga ki Facbook ke Jariye aaj Ek Chhota baccha bhi Worldwide kisi ko bhi friend request ke sahare Dosti ka hath bada sakta hai. mera maanana hai ki ye ek Aisa Website hai jo humsab ko ek sath jodne me madat karta hai. Aur ham iske sahare apne Door ke bhi Relationship, Family member, Friends ke sath massage Chat, Video call ke Dwara apni yadein sajha kar sakte hai. , Aur hum apni har ek Pal Happiness ko Apne Fb Wall pe post kar ke har din Friends ke sath Connect rahte hain.  Aapko to pata hi hoga ki Facebook pe Kitne sare user hai. jaha ham apni profile open karke dekhte hai to 5-10 user online mil hi jate hai. Ye Ek Social Media Site Hai, Aap bhi Apna Account Facebook pe Create kar sakte hai par mai janta hu ki aap already Account Bana chuke honge aur apne Experiences ko Apne Friends, Family ke Sath share karte honge. Ye ek Apne aap me hi Croro logo ko Jodke rakhna hi Mark Zuckerberg Ki success story batati hai.
TO aagiye aage Jante hai ki Facbook Ke Founder/Ceo Mark Zuckerberg Ki Biography Aur Unki Success Story, Ki Unhone Apne Facebook Site Ko Kaise Banai Aur Ham Tak Kaise pahuchaya.
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Kya aap jante hai ki Mark Zukarberg ek Worlds ke Sabse Youngester Billionaire me se ek hai jinhone www.facbebook.Com Ki Establishment ki hain. Forbes.com ne unhe 2010 me Best Billionair ka Award bhi de chuka hain. TO pahle Unke Bare Me kuch jante hai.

Mark Elliot Zuckerberg Ki Personal Story

Mark Elliot Zuckerberg Ye inka pura name hai. Jinhone America ke ‘Plains’ New York Me 14-may-1984 ko Janm Liya. Unke Family Me unke Father Edward Zuckerberg Ek Dentist the Aur Unki Mother ‘Karen Kempner‘ Ek Physiologist hai.
Aaj facebook ke Founder Zuckerberg Ko Puri dunia janti hai. Zuckerberg ki Three sister bhi hai. ‘Randi Zuckerberg‘, ‘Donna Zuckerberg‘ And ‘Arielle Zuckerberg‘ Jo New York Me hi apne Parents ke sath bade aur Zuckerberg Yahudi me Apna Bachpan bitaye.
Zuckerberg ne Apni High school ki Padhai 2000 me Ardsley High School se kiya Fir 2002 me Phillips Exeter Academy uske baad Mercy College, Harvard University join kiye.
Mark ko Pahli baar ek Ladki Pasand aayi, Jiska Name Priscilla Chan (Mark Zuckerberg Wife) hai Chan Cheines-Viyatname sarnarthi ki Daughter Thi. Jo 1975 Sygon ke girne ke bad United states aaye the. Priscilla Chan ne BraintreeMassachusetts me janm li Priscilla Chan ne apni high school Ki padhai Quincy High School, Massachusetts se ki aur Priscilla Chan, Mark Zuckerberg ko Harvard College ke ek Party me mile the jab Zuckererg 2nd Year me the.

Mark Elliot Zuckerberg Ki Achivements.

Mark Zuckerber ko bachpan se ki Programming me Interest thi, Unhone 10 saal ke the tab se Wo ek computer Pe Programming karte the papa ne unhe bachpan me Zuckerberg ko programming ki thoodi bahut knowledge di Fir wo Apne Interest ke According Sochte the, ki mai kaun sa esa Softwear banau. Ve Kuch na kuch Chhote level pe Try karte rahte the. par jab Zuckerberg 12 saal ke huye to unhone Ek ‘ZuckNet’. Ke name se Ek Massanger banaya jo pahli bar unke Papa ne apne bete ko Ek massanger Develop karne pe khusi jatai Aur Wo apne dentist office ke sare Computer pe Install kar diye, taki koi patient unse milne aaye to unke Office ke Member Unhe Isi massanger ke throw bata dete the.
Mark Zuckerberg ne GamesCommunitation se related bhi Programm/apps bhi banaye hain.
Jab Mark Ardsley High school me Greek Or Roamanie language ki padhai karte the tab bhi unhone ek Media Player Software banaya tha jiski Features kuch iss tarah se thi.
Jo aapke Manpasand yani favourate Songs ko Automaticaly Next Songs Ke liye Present karta tha iske liye Microsoft ne isse kharidni chahi par Zuckerberg me mana kar diye lekin iske badle me mark ko Microsoft ne Unhe unki Companio ke liye Job Ki bhi Offer kiye kaha. Par Mark Zuckerberg ne ise Swikar nhi kiya.

Mark Zuckerberg Ne Harvard College ki Site ko Hack Kiya.

Baat us samaye ki hai jab Mark Zuckerberg ne ek Facemash name ki site banai jiske liye wo Harvard College ke Databese Site jaha Student Apni Personal Profile Pictures Upload karte the tab Mark Zuckerberg ne Ek site banayi jisme Harvard ke Student, Apne Friends Or Dusre Ki profile Pic Ko Compare karke Voting karte the Aur Ye Hardvard ke student ko pasan aaya jisse Zuckarberg ki Site Pe Jyada Traffic aane lage, Yani Harvard ke maximum Student ise Use karne lage Isi ki wajah se Harvard Ki database Site Crashed ho gai. To hai na Hardworker Mark Zuckerberg ki Interesting Story aage bhi padhe Zuckerburg ki success story sayad aap bhi apne business ideas, Plans ke liye inspired ho pao.
Jab Hardvard ki databased site Crashed ho gayi to, Iske Liye Harvard ki Computer Hacking Community ne narmi baratate huye Esa nhi karne ki aapatti jatai, Aur samjhaya ki esa karne se Socity Par negative Effect padta hai. Us time Mark Zuckerberg ko Hacker Community ne to unhe Chhod Diya tha. Ese hi aur kafi Intresting story hai. Zuckerburg ke bare mai ispe to Network” book likhi ja chuki hai ek film bhi banai ja chuki hai jiska name hai “The Social Media” Agar aapne nhi dekhna to jarur dekhiyega. kafi positive inspirational aur Success based movie hai Jo Mark Zuckerberg ke character par filmaya gya hai.
Aur “El The  Ellah” ke name se Poetry ki kitabe bhi likhi gai, jisme kai Sare Poetry bhi samil hai.

नेत्रहीन सीईओ जिसने बना दी 50 करोड़ की कंपनी – Inspirational Story of Blind CEO Srikanth Bolla

भगवान उसे इस रंग-बिरंगी दुनिया में लाये तो सही लेकिन उसके आँखों को वो रौशनी देना ही भूल गए, जिससे वह इन रंगों को देख पाता। जिसकी जिन्दगी कभी आसान नहीं रही। जन्म से ही निराशा के काले बादल उसके जीवन में छाये रहे।
दृष्टिहिनता के कारण बचपन से ही उसने समाज में भेदभाव के व्यवहार का सामना किया।
जिसके जन्म लेते ही गांव के लोगों ने उसके माता-पिता को सलाह दी थी कि –
यह बिना आँखों का एक बेकार बच्चा हैं। जो आगे चलकर आप पर ही बोझ बनेगा।
हम बात कर रहे है, आंध्र-प्रदेश में जन्मे श्रीकांत बोला (Shrikant Bholla) की। जिन्होंने हैदराबाद में Bollant Industries के नाम से एक कंपनी शुरू की है। यह एक ऐसी कंपनी है, जिसका मुख्य उद्देश्य अशिक्षित और अपंग लोगों को रोजगार देना, उपभोक्तोओं को पर्यावरण के अनुकूल Packaging Solutions प्रदान करना हैं।
hindi kahani
श्रीकांत ने यह कार्य कर उन सभी बातों को झुठला दिया है, जिसको समाज एक दृष्टिहीन व्यक्ति द्वारा किये जाने को महज़ एक कल्पना मानता हैं। यही नहीं इस कंपनी का सलाना turnover 50 करोड़ से भी ज्यादा का है!
आज उनके पास कंपनी की चार उत्पादन ईकाइयां है – एक हुबली (कर्नाटक में), दूसरी नीजामाबाद (तेलंगना में), तीसरी भी तेलंगना के हैदराबाद में ही और चौथी, जो कि सौ प्रतिशत सौर उर्जा द्वारा संचालित होती हैं, आंध्र-प्रदेश के श्री सीटी में है। जो की चेन्नई से 55 किमी. दूर है।

गरीबी में बचपन – Childhood of Srikanth Bolla

उनका जन्म भी एक ऐसे निर्धन किसान परिवार में हुआ, जिसकी  वार्षिक आय 20000 रू. (54रू. प्रति दिन) से भी कम थी| इसका मतलब यह है कि परिवार के सदस्यों को यह भी नहीं मालूम था कि उनको शाम का खाना नसीब होगा भी या नहीं|
जब श्रीकांत बड़े होने लगे, तो उनके किसान पिता उनको अपने साथ खेत में हाथ बटाने के लिए ले जाने लगे। लेकिन वे उनकी खेत में कोई मदद नहीं कर पाते। फिर उनके पिता ने सोचा शायद ये पढ़ाई में अच्छा करे। इसलिए उन्होंने उनका नामांकन गांव के ही स्कूल, जो की उनके घर से लगभग पांच किमी. दूर था, में करवा दिया।
अब वे रोज स्कूल जाने लगे। ज्यादातर स्कूल का सफर उन्हें रोज पैदल ही तय करना पड़ता था। वे ऐसे दो सालों तक स्कूल जाते रहे।
वे कहते है-
स्कूल में कोई भी मेरी मौजूदगी को स्वीकार नहीं करता था। मुझे हमेंशा कक्षा के अंतिम बेंच पर बिठाया जाता था। मुझे PT की कक्षा में शामिल होने की मनाही थी। मेरे जीवन में वह एक ऐसा क्षण थाजब मैं यह सोचता था कि दुनिया का सबसेगरीब बच्चा मैं ही हूंऔर वो सिर्फ इसलिए नहीं कि मेरे पास पैसे की कमी थीबल्कि इसलिए की मैं अकेला था।
जब उनके पिता को यह धीरे-धीरे अनुभव होने लगा कि उनका बच्चा इस स्कूल में कुछ सीख नहीं पा रहा है, तो उन्होंने श्रीकांत को हैदराबाद के ही दिव्यांग बच्चों के विशेष विद्यालय में भर्ती कर दिया। वहां श्रीकांत कुछ ही महीनों के अंदर अच्छा प्रदर्शन करने लगे। वे वहां सिर्फ चेस और क्रिकेट खेलना ही नहीं सीख गए बल्कि वे इन खेलों में निपुण भी हो गये। कक्षा में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उतना ही नहीं कक्षा में उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के चलते उन्हें एक बार भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ Lead India Project  में काम करने का भी अवसर प्राप्त हुआ।
स्कूल में अच्छा पदर्शन करने के बावजूद उन्हें ग्यारवीं कक्षा में विज्ञान विषय का चुनाव करने से मना कर दिया गया। श्रीकांत ने दसवीं की परीक्षा आंध्र-प्रदेश स्टेट बोर्ड से 90 प्रतिशत से ज्यादा अंकों के साथ उर्त्तीण की थी। लेकिन फिर भी बोर्ड का कहना था कि ग्यारवीं में दृष्टिहीन बच्चें विज्ञान विषय को नहीं चुन सकते हैं। श्रीकांत अपने मन में सोचते –
क्या ये सिर्फ इसलिए कि मैं जन्मांध हूंनहींमुझे लोगों के देखने के नजरियें के द्वारा दृष्टिहीन बनाया गया है।
बोर्ड के द्वारा विज्ञान विषय को चुनने कि स्वीकृति नहीं दिये जाने के बाद, उन्होंने निश्चिय किया कि वे इसका विरोध करेंगे। वे कहते है –
मैंने छः महीनें तक इसके लिए सरकार से लड़ता रहा और अंत में सरकार ने ही र्निदेश जारी कर मुझे ग्यारवीं में विज्ञानलेकर पढ़ाई करने कि अनुमती दे दीलेकिन अपने बूते पर!”
इसके बाद क्या था। श्रीकांत ने दिन-रात एक कर अपने कठिन परिश्रम के बल पर बारहवीं की परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।

जब आईआईटी में दाखिला नहीं मिला – Rejected By IIT

जिन्दगी भी कभी-कभी मजाकिया ढ़ग से रूकावटों की नकल उतारने लगती है। खासकर उन लोगों के साथ जिनका कोई बड़ा उद्देश्य होता हैं। श्रीकांत के साथ भी ऐसा ही हुआ।
बारहवीं के बाद  उन्होंने देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित इंजिनीयरिंग कॉलेजों में नामांकन के लिए आवेदन किया लेकिन सभी ने आवेदन यह कह कर लौटा दिया कि ‘आप दृष्टिहीन है। इसलिए आप IIT की प्रतियोगी परीक्षा में नहीं बैठ सकते।‘ उसके बाद श्रीकांत ने आगे के रास्ते को बड़े ध्यान पूर्वक चुना और इंटरनेट के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास करने लगे कि क्या उनके जैसे लड़कों के लिए कोई Engineering Programs  उपलब्ध हैं? इसी क्रम में उन्होंने अमेरीका के कुछ प्रतिष्ठित इंजिनीयरिंग कॉलेजों में आवेदन किया। जिसमें चार कॉलेजों ने उनका आवेद स्वीकार भी कर लिया। ये कॉलेज थे – MIT, Stanford, Berkeley और Carnegie Mellon उन्होंने MIT को चुना और वे उस स्कूल के इतिहास में पढ़ने वाले पहले अंतराष्ट्रीय दृष्टिहीन विद्यार्थी बन गये। प्रारम्भ में उन्हें वहां भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उनके प्रदर्शन में सुधार आने लगा।
blind ceo with apj abdul kalam

असक्षम लोगों का सहारा बने – Social Entrepreneur

जब उनकी स्नातक की पढ़ाई पूरी हो गई तो वे अमेरीका में अपने सुनहरे भविष्य को छोड़, भारत लौट आये। यहां आकार उन्होंने शारीरिक रूप से कमजोर लोगों के लिए एक सेवा प्रारम्भ कि जिससे उन लोगों का पुनर्वासन हो सके, उनको प्रोत्साहित व मदद की जा सके और सबसे बड़ी बात, समाज में उनको एक सम्मानजनक स्थान दिलाया जा सके। इस तरह श्रीकांत ने लगभग 3000 लोगों की मदद की लेकिन जब उन्हें ये महसूस हुआ कि अब ये लोग तो सामान्य जिन्दगी जीने लगे लेकिन ये अपनी प्रतिदिन कि जरूरतों के लिए किस पर आश्रित रहेगें? उनके रोजगार का क्या होगा? इसलिए उन्होंने Bollant Industries की स्थापना कि जो अभी लगभग 200 से ज्यादा दिव्यांग लोगों को रोजगार प्रदान कर उन्हें भी सम्मान से जीवन जीने का अवसर दे रही हैं।
हर इंसान को जीवन में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। वह सपने देखता है, और उसे धरातल पर उतारने के लिए परिश्रम का सहारा लेता है। हालांकि यह दूसरी बात है कि बस कुछ ही इंसान सफलता की उस लकीर को पार कर पाते हैं, जिसके बाद दुनिया उनको सम्मान की दृष्टि से देखती है, और श्रीकांत भी उन्हीं लकीर पार करने वालों में से एक है।
उन्होंने अपंग लोगों के लिए कुछ रचनात्मक करने के दृढ़ संकल्प से दुर्भाग्य की काली घटाओं को हटा अपने आपको साबित किया। श्रीकांत जैसे लोग हमेशा दुनिया को यह साबित करके दिखाते है कि दृढ संकल्प के दम पर कुछ भी किया जा सकता है| हम श्रीकांत जैसे लोगों को सलाम करते है|
blind ceo shrikanth bolla
लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाओ जिससे वे प्रोत्साहित होसमृद्ध हो सके  अपने जीवन में लोगों को शामिल कर अकेलेपनऔर उदासीनता को समाप्त करो और अंतिमकुछ अच्छा करोवह फिर तुम्हारे पास ही लौटकर आएगा।

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