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Tuesday, 18 July 2017

“द मिल्कमैन ऑफ़ इंडिया” जिन्होंने बनाया सबसे बड़ा ब्रांड – Success Story of Amul In Hindi

यह कहानी हैं ऐसे व्यक्ति के संघर्ष के बारे में जिसने किसानों को मुनाफा (पैसे) कमाने का मौका दिया|कुरियन के पास इतनी डिग्रियां थी कि वह अगर चाहते तो कोई उच्चे पद की नौकरी कर सकते थे| वर्गीस कुरियन को संपति का अभाव नहीं था उनके पिता कोच्ची में सिविल सर्जन थे| लेकिन उनमे कुछ कर दिखाने का जूनून था|
इसलिए उन्होंने दूध उद्योग को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और कई नामों से उद्योग खोलकर लोगों को नौकरी देने के साथ-साथ मुनाफा भी कमाया| पदभूषण और पदश्री जैसे सम्मानों से अलंकृत डाॅ कुरियन कई लोगों के लिए प्ररेणास्त्रोत हैं|
रोमांचक बात यह हैं की इस अनुठी कहानी को रचने वाले व्यक्ति की क्रांति से जाने-अनजाने हम सभी जुडे हुए हैं. फिर वह चाहे अमूल के नाम के जरिए ही क्यों न हो|यह कहानी हैं अमूल के संस्थापक वर्गिस कुरियन की|

STORY BEHIND AMUL’S SUCCESS

आम तौर पर भौतिकी में स्नातक, BE Mechanical और America से Master Of Science जैसी Degree लेने के बाद Iron steel, petro chemical और Automated Manufacturing जैसे असीमित संभावनाओं वाले क्षेत्रों में इन डिग्रीयोंधारियों वाले व्यक्ति का स्वागत शानदार नौकरी और बेशुमार पैसे से होता है.
लेकिन यदि इन डिग्रीयों के बावजूद कोई भैस के दूध का उत्पादन Milk Powder, Condensed milk और डेयरी उत्पादों पर काम करता नजर आये तो यह कुछ अटपटा लग सकता है और शुरू में लोग उसे बेवकूफ़ भी कह सकते हैं|
डाॅ वर्गीस कुरियन ही वह Mechanical Engineer हैं जिन्होंने दूध उद्योग में नई क्रांति को जन्म दिया| मद्रास के लोयोला काॅलेज से भौंतिकी में स्नातक, मद्रास से BE Mechanical और America की Michigan University से Mechanical Engineering में Master of science की उपाधि लेने के बाद डाॅ कुरियन ने अपनी किस्मत को दूध उद्योगों में अपनाया और अपने प्रयासों की बदोलत इस क्षेत्र में नई उचाइयां दी|
उनका विश्वास था कि समृद्धि मोटी तनख्वा से नहीं आती बल्कि अपनी प्रतिभा को उस जगह इस्तेमाल करने से आती हैं, जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है|

FARTHER OF WHITE REVOLUTION – श्वेत क्रांति के जनक

समृद्धि की यह नींव तब पडी जब डाॅ कुरियन गुजरात के आंणद शहर पहूंचे| वे गवर्नमेंट रिसर्च डिपार्टमेंट में बतौर डेयरी इंजीनियर के पद पर नियुक्त हुए| वहां से छोटी और बडी से बडी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया|
विज्ञान के छात्र के रूप में प्रयोंगों के प्रति उनका झुकावा होना स्वाभाविक था और इसीलिए उन्होंने कुछ नये प्रयोग भी किए जैसे गाय के दूध की बजाय भैस के दूध का उत्पादन करना. अपने अनुभव से उन्होंने सहकारी समितियों में यह प्रस्ताव रखा कि किसान स्वयं के लघु उद्योग में प्रबधन करके अच्छा मुनाफा कमाये|

OPERATION FLOOD 

वह “Farther Of White Revolution”(श्वेत क्रांति) व Milk Men Of India के रूप में मशहूर हुए हैं| डाॅ वर्गीस ने विशाल डेयरी डेवलपमेंट प्रोग्राम को आपरेशन फ्लड के नाम से चलाया. यह उस समय दुनिया का सबसे बडा डेयरी डेवलपमेंट प्रोग्राम था और किसानों और ग्रहणीयों के लिए मुनाफे का आधार बना|आपरेशन फ्लड के कारण 72000 भारतीय गाँव दूध उत्पादक बने|
उनके क्रांतिकारी प्रयोग न केवल सफल रहे बल्कि उपलब्धि माने गये लेकिन कुरियन ने इस सरकार द्वारा मिली छात्रवृत्ति और उससे हासिल की गई शिक्षा को देश के विकास में अपने योगदान के रूप में लौटाने से अधिक कुछ नहीं माना|
यहां तक कि जो प्रयोग दुनिया को क्रांतिकारी लगते थे वे कुरियन को संतुष्ट तक नहीं कर पाये. अपने योगदान से असंतुष्ट कुरियन ने वहां से जाने का मानस बना लिया. कुरियन ने बेशक कंपनी बदल दी लकिन आणद उनकी कर्मभूमि बन चुका था|
गर्वनमेंट रिसर्च क्रिमरी की नौकरी छोडने के तुरन्त बाद त्रिभूवन दास से जुडने का प्रस्ताव आया जो कायरा खेडा डिस्ट्रिक्ट को-ओपरेटिव मिल्क प्राड्सर्स युनियन लिमिटेड के संचालक थे, जिन्हें नियुक्त करने का निर्णय उस वक्त खेडा कांग्रेस की बागडौर संभाल रहे सरदार पटेल और मोरारजी देसाई ने लिया था.
त्रिभूवनदास सत्याग्रही भी थे और Kaira District Cooperative Milk Producers Union Limited (KDCMPUL),KDCMPUL के माध्यम से सहयोगात्मक आंदोलन चलाना चाहते थे. त्रिभुवनदास के आग्रह को कुरियन ठुकरा न सके| दरअसल इस आग्रह से ज्यादा महत्वपूर्ण उनके लिए वह चुनौती थी जो KDCMPUL के रूप में उनेक सामने खडी थी.
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कुरियन ने केडीसीएमपीयुएल को तब थामा जब वहां पेस्टानजी एदुल जी की पोलसन का एकाधिकार था और KDCMPUL काफी कमजोर हालत से गुजर रही थी. KDCMPUL की चुनोतियां बहुत आसान नहीं थी. इसका प्रमाण था कि यहां प्रवेश करते ही उन्हें कहीं संघर्षों का सामना करना पडा लकिन कोई भी बाधा कुरियन के इरादों को झुका न सकी.
KDCMPUL के मैनेजर के रूप में प्रबंधकीय काम निभाने के आलावा उन्होंने मंत्रियों अधिकारियों और सिविल सर्वेंटस का भी सामना किया और निर्णायक परिणाम हासिल किए. उनकी मेहनत और लगन रंग लाने लगी.
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वे एक के बाद एक सफलता हासिल करने लगे. इस दौरान लगातार त्रिभूवनदास लगातार उनके पथ प्रदर्षक सलाहकार और नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाते रहे. अभी और भी मंजिलें तय करनी बाकी थी जिन्हें हासिल करने के लिए कुरियन ने मजबूत रणनीति के तहत 1946 में चकलासी गांव में मिटींग की.
इस मिटिंग में दो ऐतिहासिक प्रस्ताव स्वीकृत हुए जिसके परिणाम स्वरूप भारत में डेयरी सहकारिता आंदोलन समूह की नींव रखी गई. जिसके तहत किसानों ने भी निश्चय किया था की वे पोलसन को दूध की आपूर्ति नहीं करेंगे तथा हर गांव में सहकारी समितियों का निर्माण व आंणद मे यूनियन की स्थापना करेंगे.
धीरे-धीरे सभी मुद्दों को संचालित किया जाने लगा और कुरियन व त्रिभूवनदास दोनों एक-दूसरे के आदर्ष साझेदार साबित होने लगे. दोनों ने अपने-अपने स्तर पर काम बांट लिया. जहां एक तरफ त्रिभूवनदास राजनैतिक और सामाजिक प्रक्रिया को सभांलते थे वहीं दूसरी तरफ कुरियन ने टेक्नोक्रेट के रूप में किसानों का सेवाकार बनना स्वीकार किया.
साथ ही कुरियन ने अपने सामने खुद ही लक्ष्य तय किये इन लक्ष्यों का मूल ईमानदारी, ध्येय, और पारदर्षिता थी और बेहतर गुणवत्ता मुख्य उद्देष्य था. डाॅ कुरियन के शब्दों में –
मैं हमेशा से मानता था कि ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण हैं साथ ही अपना काम दृढता से करो और अपने प्रयासों को थमने न दो यही सफलता का रहस्य है.
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अपनी इसी सोच के साथ उन्होंने प्रयास जारी रखे. KDCMPUL को एक मुकाम देने के बाद उन्होंने नये प्रयोग के रूप में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की स्थापना की ताकि आणद पेटर्न को विश्वस्तरीय बनाया जा सके.
धीरे-धीरे KDCMPUL की उपलब्धियों ने शवेत क्रांति को जन्म दिया. यह इतना प्रभावी था कि इसका प्रचार श्याम बेनेगल की डाक्यूमेंट्री मंथन में दिखा. दरअसल इस क्रांति ने दूध उद्योग का चेहरा बदल कर रख दिया.
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FOUNDATION OF AMUL 

Founder of White Revoluation Veghese Kurien
कुरियन जानते थे कि उनका काम अभी खत्म नहीं हुआ है. KDCMPUL की सफलता के बाद उन्होंने अमूल पैटर्न की नींव रखी उस वक्त गिने चूने लोगे ही इसके बारे में जानते थे और इस बात से अनजान थे कि एक दिन यह विश्व स्तर पर एक ब्रांड के रूप में उभरेगा.
धीरे-धीरे अमूल की गिनती श्रेष्ठ ब्रांड में होने लगी और विज्ञापन द्वारा उसका प्रचार-प्रसार होने लगा. उसकी पंचलाईन “द टेस्ट आॅफ इंडिया” “अटरली-बटरली डिलीसियस” “अमूल दूध पीता है इंडिया” हर किसी की जुबान पर था.
आज अमूल एक स्थापित ब्रांड है. अमूल की कामयाबी हासिल करने के बाद डाॅ वर्गीस ने इंस्टीट्यूशन का निर्माण शुरू किया और एक के बाद एक प्रधान संस्थाओं का निर्माण शुरू किया. जैसे नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड NDV 1965, गुजरात को-आॅपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन GCMMF 1973.
वह मैनेजमेंट के प्रमुख संस्थान IIMS अहमदाबाद और बेंगलुरु के सदस्य भी रहे. उनके काम को सरकार ओर कई प्रतिष्ठि संस्थाओं ने सराहा और कई पुरस्कारों से नवाजा. लेकिन कुरियन ने हमेशा इसे अपने देश के लिए किये गये छोटे से प्रयास के रूप् में देखा और प्रत्येक उपलब्धि, प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा को देश और लोगों की संपति की तरह समझा.
उनका विश्वास था कि लोगों के सहयोग से आणंद सफलता तक पहुँच पाया है. अगर गरीब किसान और पशुपालक खुद सबल नही बनना चाहते, तो वे कभी सफल नही हो पाते.
कुरियन के द्वारा लिखी गई किताब – “आई टू हेड हे ए ड्रीम” में उन्होंने अपने जीवन के तमाम संघर्ष और उपब्धियों को जिक्र किया है. वे कहते हैं मेरे जीवन का सिद्धांत यही हैं कि
मैं उन लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा अच्छा काम करूं जो गरीब व असहाय है. लेकिन मैं अपनी जिंदगी एक साधारण आदमी की तरह व्यतित करूं.
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कुरियन अपने शद्बों को जीने वाले में से है. इसका प्रमाण हैं उन्होंने गरीब किसानों और दलित आदिवासियों को आगे आने का मौका दिया और आज अमूल पूरे देश में प्रसिद्ध है|
उनके जन्मदिन को “राष्ट्रीय दूध दिवस (National Milk Day)” के रूप में मनाया जाता हैं
समृद्धि को देखने को सबका अपना नजरिया होता है. कोई मोटी तनख्वा में देखता हैं तो कोई प्रसद्धि में तो कोई दूसरे के हितों में. डाॅ वर्गीस कुरियन उन लोगों में से हैं जिन्हें कमजोर लोगों को सबल बनाने में यह समृद्धि नजर आयी. उनके प्रयासों और सफलता ने इसी विश्वास को साबित कर दिखाया. उन्होंने इजीनियरिंग में पढाई के बावजूद दूध उद्योग को अपना कार्यक्षेत्र बनाया जहां लोगों को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत थी.Hot Downloads of 2015 !

Wednesday, 12 July 2017

1009 बार रिजेक्ट हुए: KFC Motivational Success Story in Hindi

यह Hindi Motivational story एक कर्नल सैंडर्स नाम के व्यक्ति की है जो आज एक अरबपति और KFC Chicken comapny का मालिक है, इन्होने अपनी success को हासिल करने से पहले तक़रीबन 1009 बार नाकामयाबी पाई थी पर फिर भी वो रुके नहीं और आज उन्होंने साबित कर दिया की कोशिश करने वाली की कभी हार नहीं होती.

कहानी की शुरुआत

आपको KFC का चिकन पसंद है या नहीं लेकिन KFC के success के पीछे कर्नल सैंडर्स की story आपको जरुर पसंद आएगी। एक बार किसी कारण से कर्नल सैंडर्स का चलता हुआ बिज़नस बंद हो गया। उस वक्त उनकी उम्र 65 हो चुकी थी और हाल यह था की खोने के लिए अब उनके पास में कुछ भी नहीं बचा था।
लेकिन कर्नल सैंडर्स भी अड़े रहे, लगे रहे, सीखते रहे और चलते रहे। और करते-करते एक हजार नौ (1009) लोगो ने उनको रिजेक्ट कर दिया फिर जाकर उनको मिली उनकी पहली हाँ।
हाँ अपने सही पढ़ा है, एक हजार नौ बार रिजेक्ट होने के बाद, एक हजार नौ बार ना सुनने के बाद उनको उनकी पहली हाँ मिली
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Tuesday, 11 July 2017

Narendra Modi biography in Hindi | नरेन्द्र मोदी की जीवनी

पूरा नाम  – नरेन्द्र दामोदरदास मोदी
जन्म       – 17 सितम्बर 1950
जन्मस्थान – वडनगर, जि. मेहसाना (गुजरात).
पिता       – दामोदरदास मूलचंद मोदी
माता      – हीराबेन मोदी
विवाह     – जशोदाबेन के साथ

नरेन्द्र मोदी की जीवनी – Narendra Modi biography in Hindi

नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को वडनगर के मेहसाना जिले में पंसारी परिवार में हुआ, उनका परिवार मोड़-गंची-तेली संप्रदाय से संबंध रखता हैं, जो भारत सरकार के इतर पिछड़ा वर्ग में आते है. वे दामोदरदास मूलचंद और हीराबेन मोदी को हुए 6 बच्चो में से तीसरे थे. बच्चे होने के नाते नरेन्द्र मोदी वडनगर रेल्वे स्टेशन पर अपने पिता की चाय बेचने में मदत करते थे, और कुछ समय बाद में अपने भाई के साथ बस स्टैंड के पास खुद का चाय का स्टाल चलाना शुरू किया.
उन्होंने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा 1967 में वडनगर से ही प्राप्त की, उनके शिक्षक ने उनके बारे में बताया की वे एक साधारण विद्यार्थी के साथ एक जबरदस्त वाद-विवादी थे. वाद विवाद में उनकी वाक्पटुता के लिए शिक्षको ने उन्हें सम्मानित भी किया. मोदी नाटक बनाते समय कोई ऐसी भूमिका निभाते थे जो उनके जीवन से भी बड़ा हो, और इसी का प्रभाव उनके राजकीय जीवन पे भी पड़ा.
उन्होंने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा 1967 में वडनगर से ही प्राप्त की, उनके शिक्षक ने उनके बारे में बताया की वे एक साधारण विद्यार्थी के साथ एक जबरदस्त वाद-विवादी थे. वाद विवाद में उनकी वाक्पटुता के लिए शिक्षको ने उन्हें सम्मानित भी किया. मोदी नाटक बनाते समय कोई ऐसी भूमिका निभाते थे जो उनके जीवन से भी बड़ा हो, और इसी का प्रभाव उनके राजकीय जीवन पे भी पड़ा.
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मोदीजी ने 8 साल की अल्पायु में RSS के स्थानीय शाखाओ में प्रशिक्षण हेतु उपस्थित रहना शुरू किया. और वहा उनकी मुलाकात लक्ष्मणराव इनामदार से हुई, जो वकील साहेब के नाम से भी जाने जाते थे, जिन्होंने मोदी को RSS का बालस्वयमसेवक भी नियुक्त किया, और वे मोदी के राजकीय सलाहकार भी बने. जब मोदी RSS में अपना प्रशिक्षण ले रहे थे तब वे वसंत गजेंद्रगडकर और नाथालाल जघदा, भारतीय जन संघ के नेताओ से भी मिले जो बाद में गुजरात में 1980 में बीजेपी के सदस्य बने.
और कम उम्र में ही उनका स्थानीय लड़की जशोदाबेन के साथ विवाह कर दिया गया, नरेन्द्र मोदी उसी समय हाई स्कूल से स्नातक हुए थे इसलिए उन्होंने अपने इस विवाह को अस्वीकार किया. और कुछ पारिवारिक उलझनों की वजह से 1967 में उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा. परिणाम स्वरुप उन्होंने अपने 2 उत्तरी और उत्तर-पूर्व की यात्रा करने में व्यतीत किये.
साक्षात्कार में मोदी ने स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिंदु आश्रम का भी उल्लेख किया, और साथ ही कोलकाता के बेलूर मठ, अल्मोरा के अद्विता आश्रम और राजकोट के रामकृष्ण मिशन का भी उल्लेख किया. हर जगह पर बहोत कम समय तक ही रुके थे, क्यू की उनके पास कोई महाविद्यालयीन शिक्षण नहीं था.
मोदी 1968 में बेलूर मठ पहोचे और जल्द ही वहा से निकाल गये, और मोदी ने सबसे जादा कलकत्ता, पश्चीम बंगाल और असम और गुवाहाटी के रास्तो पर यात्रा की. और फिर अंत में वे अल्मोरा के रामकृष्ण आश्रम गये, जहा उच्चशिक्षण ना होने के वजह से उन्हें दोबारा निकाला गया. और फिर वे दिल्ली और राजस्थान होते हुए 1968-69 में वापिस गुजरात आये.
कभी-कभी वो 1969-70 के आस-पास अहमदाबाद छोड़ने से पहले एक-दो बार वडनगर देखने भी गये थे. वे बाद में अपने अंकल के साथ रहने लगे, जो गुजरात के रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में ही काम करते थे. अहमदाबाद में मोदी ने इनामदार को फिर से अपना परिचय दिया, जो हेडगेवार भवन (RSS मुख्य कार्यालय) में मौजूद थे.
1971 के इंडो-पाक युद्ध के बाद, उन्होंने अपने अंकल के लिए काम करना बंद किया और और RSS के एक फुल टाइम प्रचारक बन गये. 1978 में ही मोदी RSS के संभाग प्रचारक बने और दिल्ली विद्यालय से राजनीती शास्त्र की डिग्री भी प्राप्त की. और पाच साल बाद उन्हें राजनीती शास्त्र में गुजरात विद्यालय से मास्टर और आट्र्स की डिग्री मिली.

नरेन्द्र मोदी / Narendra Modi का राजनीती को समर्पित जीवन

नरेन्द्र मोदी जी ने अपना पूरा जीवन 1971 में RSS join करने के बाद राजनीती को ही समर्पित किया. 1975-77 में जब राजनितिक झगडे चल रहे थे तब प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी में राज्यों में आपातकाल घोषित किया और RSS जैसी संघटनाओ को बंद करने कहा. तब मोदी ने गुप्त रूप से एक पुस्तक लिखी जिसका नाम “संघर्ष माँ गुजरात”, जिसमे उन्होंने गुजरात के राजनीती को वर्णित किया था.
1978 में, मोदी दिल्ली से राज्यशास्त्र में स्नातक हुए और गुजरात यूनिवर्सिटी में उनका मास्टरी का काम भी 1983 में खत्म किया.
1987 में नरेन्द्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए, बीजेपी में वे दिन ब दिन आगे बढ़ते गए और सामाजिक हितो के कई काम उन्होंने बीजेपी में रहकर किये. उन्होंने Business के Privatisation, छोटे Business को बढ़ावा दिया. 1995 में मोदी राष्ट्रीय मंत्री के रूप ने नियुक्त हुए, 1998 के चुनाव में बीजेपी को आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा हात था.
फेबुअरी 2002 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे. आने जाने वाली ट्रेन पर किसी ने अटैक किया, जो कथित रूप से मुस्लिमो ने किया था. और बदले के प्रतीशोध/ इरादे से गुलबर्ग के मुस्लिमो पर भी हमला किया गया. इस तरह हिंसा बढती गयी इस वजह से मोदी सरकार को उस समय कर्फ्यू की घोषणा करनी पड़ी.
कुछ समय बाद दोनों ही समुदाय में शांति की स्थिति आई और तब मोदी सरकार की कई लोगो ने पुरे देश में आलोचना की क्यू की उस हमले में 1000 से भी ज्यादा मुस्लिम मारे गए थे. मोदी के विरुद्ध 2 जांच कमिटी गठित करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पाया की मोदी के विरुद्ध कोई गवाह नहीं है जिस से उन्हें दोषी ठहरा सके.
और बाद में मोदी 2007 और 2012 में पुनः गुजरात के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए. और तब से मोदी हिन्दित्वावादी बातो पर कम और आर्थिक development पर ज्यादा ध्यान देने लगे. गुजरात के विस्तार और प्रगतशील होने का श्रेय आज भी मोदी को ही दिया जाता है. आज उनका गुजरात मॉडल पुरे राष्ट्र में प्रसिद्द है. क्यू की उन्होंने गुजरात से गरीबी हटाकर वहा कामकाज बढाया.
 नरेन्द्र मोदी / Narendra Modi का प्रधानमंत्री नियुक्त होना
जून 2013 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की और से मोदी को प्रधानमंत्री उम्मेदवार घोषित किया गया. जहा कई लोगो ने पहले से ही उन्हें भारत का प्रधानमंत्री मान लिया था. क्यों की कई लोगो का मानना था की मोदी में भारत की आर्थिक स्थिति बदलने का और भारत का विकास करने की ताकत है और अंत में मई 2014 में उन्होंने और उनकी बीजेपी पार्टी में लोकसभा चुनाव में 534 में से 282 सीट प्राप्त कर इतिहासिक जित दर्ज की. और इसी जित के साथ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को हराया, जो पिछले 60 सालो से भारतीय राजनीती को संभाल रही थी. और भारतीय जनता ने उस समय दिखा दिया था के वे उस समय मोदी के रूप में भारत में बदलाव लाना चाहते थे.
और इसी जित के साथ उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को हराया, जो पिछले 60 सालो से भारतीय राजनीती को संभाल रही थी. और भारतीय जनता ने उस समय दिखा दिया था के वे उस समय मोदी के रूप में भारत में बदलाव लाना चाहते थे.
2014 के फेमस नारे : अबकी बार मोदी सरकार & अच्छे दिन आने वाले है!

बस कंडक्टर से सुपरस्टार बनने की कहानी –

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रजनीकांत – आम लोगों के लिए उम्मीद का प्रतीक| यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि रजनीकांत ऐसे इंसान हें जिन्होंने फर्श से अर्श तक आने की कहावत को सत्य साबित करके बताया हो| दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने बड़ी बड़ी सफलताएं अर्जित की पर जिस तरह रजनीकांत ने अभावों और संघर्षों में इतिहास रचा है वैसा पूरी दुनिया में कम ही लोग कर पाएं होंगे|
एक कारपेंटर से कुली बनने, कुली से बी.टी.एस. कंडक्टर और फिर एक कंडक्टर से विश्व के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सुपरस्टार बनने तक का सफ़र कितना परिश्रम भरा होगा ये हम सोच सकते हैं|
रजनीकांत का जीवन ही नहीं बल्कि फिल्मी सफ़र भी कई उतार चढ़ावों से भरा रहा है| जिस मुकाम पर आज रजनीकांत काबिज़ हैं उसके लिए जितना परिश्रम और त्याग चाहिए होता है शायद रजनीकांत ने उससे ज्यादा ही किया है|

संघर्षपूर्ण बचपन – EARLY LIFE OF RAJNIKANTH

रजनीकांत का जन्म 12 दिसम्बर 1950 को कर्नाटक के बैंगलोर में एक बेहद मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ था| वे अपने चार भाई बहनों में सबसे छोटे थे| उनका जीवन शुरुआत से ही मुश्किलों भरा रहा, मात्र पांच वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपनी माँ को खो दिया था| पिता पुलिस में एक हवलदार थे और घर की माली स्तिथि ठीक नहीं थी| रजनीकांत ने युवावस्था में कुली के तौर पर अपने काम की शुरुआत की फिर वे ब.टी.एस में बस कंडक्टर (bus conductor) की नौकरी करने लगे|

रजनीकांत का अंदाज़ – STYLE OF RAJNIKANTH 

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एक कंडक्टर के तौर पर भी उनका अंदाज़ किसी स्टार से कम नहीं था| वो अपनी अलग तरह से टिकट काटने और सीटी मारने की शैली को लेकर यात्रियों और दुसरे बस कंडक्टरों के बीच विख्यात थे| कई मंचों पर नाटक करने के कारण फिल्मों और एक्टिंग के लिए शौक तो हमेशा से ही था और वही शौक धीरे धीरे जुनून में तब्दील हो गया|
लिहाज़ा उन्होंने अपना काम छोड़ कर चेन्नई के अद्यार फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला ले लिया| वहां इंस्टिट्यूट में एक नाटक के दौरान उस समय के मशहूर फिल्म निर्देशक के. बालाचंदर की नज़र रजनीकांत पर पड़ी और वो रजनीकांत से इतना प्रभावित हुए कि वहीँ उन्हें अपनी फिल्म में एक चरित्र निभाने का प्रस्ताव दे डाला| फिल्म का नाम था अपूर्व रागांगल| रजनीकांत की ये पहली फिल्म थी पर किरदार बेहद छोटा होने के कारण उन्हें वो पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे योग्य थे| लेकिन उनकी एक्टिंग की तारीफ़ हर उस इंसान ने की जिसकी नज़र उन पर पड़ी|

विलेन से हीरो बने – FILMI CAREER OF RAJNIKANTH

रजनीकांत का फिल्मी सफ़र भी किसी फिल्म से कम नहीं| उन्होंने परदे पर पहले नकारात्मक चरित्र और विलेन के किरदार से शुरुआत की, फिर साइड रोल किये और आखिरकार एक हीरो के तौर पर अपनी पहचान बनाई|
हालांकि रजनीकान्त,  निर्देशक के. बालाचंदर को अपना गुरु मानते हैं पर उन्हें पहचान मिली निर्देशक एस.पी मुथुरामन की फिल्म चिलकम्मा चेप्पिंडी से|  इसके बाद एस.पी. की ही अगली फिल्म ओरु केल्विकुर्री में वे पहली बार हीरो के तौर पर अवतरित हुए| इसके बाद रजनीकांत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और दर्जनों हिट फिल्मों की लाइन लगा दी| बाशा, मुथू, अन्नामलाई, अरुणाचलम, थालाप्ति उनकी कुछ बेहेतरीन फिल्मों में से एक हैं}|

उम्र कोई मायने नहीं रखती – AGE IS JUST A NUMBER

रजनीकांत ने यह साबित कर दिया की उम्र केवल एक संख्या है और अगर व्यक्ति में कुछ करने की ठान ले तो उम्र कोई मायने नहीं रखती| 65 वर्ष के उम्र के पड़ाव पर वे आज भी वे शिवाजी- द बॉस, रोबोट, कबाली  जैसी हिट फिल्में देने का माद्दा रखते हैं|
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रजनीकांत की फिल्म कबाली का पोस्टर | 65 वर्षीय रजनीकांत के लोग इतने दीवाने है कि कबाली फिल्म ने रिलीज़ होने से पहले ही 200 करोड़ रूपये कमा लिए |

एक समय ऐसा भी था जब एक बेहतरीन अभिनेता होने के बावजूद उन्हें कई वर्षों तक नज़रंदाज़ किया जाता रहा पर उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी| ये बात रजनीकांत के आत्मविश्वास को और विपरीत परिस्तिथियों में भी हार न मानने वाले जज्बे का परिचय देती है|

जमीन से जुड़े हुए – HUMBLENESS OF RAJNIKANTH

real life photo rajinikanth biographyरजनीकांत आज इतने बड़े सुपर सितारे होने के बावजूद ज़मीन से जुड़े हुए हैं| वे फिल्मों के बाहर असल जिंदगी में एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही दिखते है| वे दूसरे सफल लोगों से विपरीत असल जिंदगी में धोती-कुर्ता पहनते है| शायद इसीलिए उनके प्रशंसक उन्हें प्यार ही नहीं करते बल्कि उनको पूजते हैं|
रजनीकांत के बारे में ये बात जगजाहिर है कि उनके पास कोई भी व्यक्ति मदद मांगने आता है वे उसे खाली हाथ नहीं भेजते| रजनीकांत कितने प्रिय सितारे हैं, इस बात का पता इसी से लगाया जा सकता है कि दक्षिण में उनके नाम से उनके प्रशंशकों ने एक मंदिर बनाया है| इस तरह का प्यार और सत्कार शायद ही दुनिया के किसी सितारे को मिला हो|
चुटुकलों की दुनिया में रजनीकांत को ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जिसके लिए नामुनकिन कुछ भी नहीं और रजनीकांत लगातार इस बात को सच साबित करते रहते है| आज वे 65 वर्ष की उम्र में रोबोट-2 फिल्म पर काम कर रहे है, उनका यही अंदाज लोगों के दिलों पर राज करता है|
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नरेन्द्र मोदी की सफलता का रहस्य - नरेन्द्र मोदी : अद्भुत व्यक्तित्व

नाम – नरेन्द्र दामोदरदास मोदी| जन्म – 17 सितम्बर 1950| वर्तमान में सबसे चर्चित व्यक्ति| नरेन्द्र मोदी वाकई में एक लीडर है और उनके सामने सारी मुसीबतें कमजोर पड़ जाती है| यह उनका व्यक्तित्व ही है जिसके कारण आज वह भारत के प्रधानमंत्री (Prime Minister ) है और विश्व की निगाहें उन पर टिकी हुयी है| नरेन्द्र मोदी भारत के ज्यादातर व्यक्तियों के आदर्श बन गए है और उनके व्यक्तित्व की खूबियों का परिक्षण करके हम भी अपने व्यक्तित्व को उत्तम बना सकते है क्योंकि यह हमारा व्यक्तित्व एंव चरित्र ही होता है जो हमें सफल बनाता है|

SUCCESS MANTRA OF NARENDRA MODI

  1. मेहनत (HARDWORK):-

नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) की सफलता का सबसे बड़ा राज यही है कि वह बहुत ज्यादा मेहनत करते है| चुनाव के समय वह केवल 3-4 घंटे ही सोते थे एंव प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वह 18 घंटे कार्य करते है| मेहनत से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है एंव सफलता के सारे रास्ते खुल जाते है| यह मोदी की मेहनत ही है जिसके कारण एक चाय बेचने वाला आज भारत का प्रधानमंत्री है|
  1. आत्मविश्वास (SELF-CONFIDENCE):-

Narendra Modi में गज़ब का आत्मविश्वास है| वह मुसीबतों से नहीं डरते और हमेशा प्रेरित एंव उत्साहित रहते है| आत्मविश्वास वहीँ होता है जहाँ किसी भी प्रकार का कोई “डर” नहीं होता|
  1. सही समय पर सही निर्णय (RIGHT DECISION AT RIGHT TIME):-

Modi की टाइमिंग गज़ब की है एंव वे प्रत्येक अपना प्रत्येक decision सही समय पर लेते है| Decision जितना महत्वपूर्ण होता है उसकी timing भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है| Narendra Modi ने शपथ समारोह में सभी देशों के प्रमुखों को बुलाकर सही टाइम पर सही decision लिया| मोदी ने हवाई वादे नहीं किये एंव उनकी सरकार के पहले बजट में भी इसी बात पर जोर दिया गया कि सबसे पहले अधूरी योजनाओं को पूरा किया जायेगा| मोदी निरंतर अपने सांसदों के साथ मीटिंग करते है एंव उन्हें ज्यादा से ज्यादा समय संसद में बिताने, काम पर ध्यान देने एंव फालतू बयानबाजी से बचने की सलाह देते है|
  1. व्यवहारकुशलता एंव पहनावा :-

Modi की वाणी बुलंद है एंव उनके पास गज़ब की बोलने की कला है| Modi जब जनता के सामने बोलते है तो वे जनता की बात करते है और तेज आवाज से बोलते है एंव वे जब विदेशों के प्रमुखों के साथ बातचीत करते है तो बड़े आराम एंव शांतिपूर्ण तरीके के साथ बातचीत करते है|
Modi जहाँ भी जाते है वहां के हो जाते है| Modi जहाँ भी जाते है वहां की बात करते है, अगर वे राजस्थान जाते है तो राजस्थान की विशेषताओं की बात करते है एंव अगर वो नेपाल जाते है तो नेपाल की खूबसुरती की बात करते है| इसलिए उस क्षेत्र के लोगों को Modi अपने लगते है|
Modi अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देते है एंव इसीलिए आज वे स्टाइल आइकॉन बन गए है एंव मार्केट में उनके स्टाइल के कपड़ों की विशेष डिमांड है|

  1. सकारात्मक एंव आशावादी (POSITIVE THINKING):-

Modi सकारात्मक सोच रखते है एंव आशावादी बनने की सलाह देते है| वे एक motivational गुरु की तरह बात करते है एंव दूसरों को प्रेरित करते रहते है| वे कार्य को सकारात्मक रूप से शुरू करते है एंव उसे पूरा करने के लिए जी जान लगा देते है| Modi आलोचनाओं की परवाह नहीं करते एंव आलोचनाओं को मुंह तोड़ जवाब देते है| वे जानते हैं कि अगर आलोचनाओं में दम नहीं है, तो वो आलोचना उनके लिए फायदेमंद हैं क्योंकि इससे बिना किसी खर्च के उनका प्रचार होता हैं|
  1. रचनात्मक सोच (CREATIVE THINKING):-

Modi रचनात्मक रूप से सोचते है (Creative thinking) एंव रचनात्मकता को बढ़ावा देते है| वे हमेशा समस्याओं का समाधान, creative ideas के द्वारा करते है| उन्होंने www.mygov.nic.inwebsite launch की ताकि वे जनता से सीधे जुड़ सकें एंव जनता के महत्वपूर्ण सुझाव उन्हें प्राप्त हो सके| Modi के चुनाव प्रचार का मुख्य साधन social media थी एंव यह उनकी creative thinking को दर्शाता है |
  1. भारत की बात करते है (INDIA FIRST):-

Narendra Modi अपनी पार्टी से ज्यादा भारत (India First) की बात करते है जो उन्हें अन्य पार्टियों के नेताओं से अलग बनाता है| नरेन्द्र मोदी जानते है कि अगर भारत मजबूत हुआ तो उनकी पार्टी स्वत: मजबूत हो जाएगी, लेकिन अन्य पार्टियों ने इस बात को नहीं समझा और उन्हें इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ा| नरेन्द्र मोदी ने अपनी पार्टी को इस तरह से पेश किया है कि जनता के सामने उनसे अच्छा कोई विकल्प नहीं रहा |

  1. परिवर्तन को अपनाते है :-

अगर इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी की तुलना करें तो उनमे सबसे बड़ा फर्क यह था कि कांग्रेस ने अपना वही पुराना तरीका अपनाया एंव जनता की भावनाओं को समझ नहीं सकी लेकिन मोदी यह समझ गए कि जनता विकास चाहती है न की धर्म की राजनीती इसलिए Narendra Modi ने अपनी किसी भी रैली में धर्म सम्बन्धी बात नहीं की|

  1. सबको साथ लेकर चलते है :-

Modi का यह मंत्र “सबका साथ, सबका विकास” (SABAKA SATH, SABAKA VIKAS) आज अमेरिका को भी पसंद आ रहा है| मोदी हमेशा से ही सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करते रहते है| हमेशा यह देखा गया है कि जब भी नयी सरकार बनती है तो मंत्री पद को लेकर हमेशा कोई न कोई मतभेद देखने को मिलते है लेकिन आज Modi की सरकार में आपस में कोई मतभेद नहीं है जबकि कुछ वर्षों पूर्व बीजेपी में ही एक साथ कई मतभेद देखने को मिलते थे| Modi की एक खास बात यह भी है की मतभेदों को बाहर आने से पूर्व ही वे उन्हें सुलझा देते है|

 10. अनुशासन (DISCIPLINE ) :-

Modi की जब से सरकार बनी है वे एक Professional CEO की तरह कार्य कर रहे है एंव अपने सांसदों की निरंतर class ले रहे है एंव उन्हें सख्त हिदायत दे रहे है कि सांसद, संसद की कार्यवाही में भाग ले एंव समय पर संसद पहुंचे| यह उनका अनुशासन ही था कि वे दिन में एक साथ 4-5 रैलियां करते थे एंव 18-20 घंटे मेहनत करते थे|

11. शारीरिक सक्षमता:-

मोदी एक फिट नेता है एंव वे इतनी ज्यादा मेहनत करने के बावजूद कभी भी थके हुए नहीं लगते| वे हमेशा आत्मविश्वास(Confidence) से भरे हुए रहते है एंव उनका energy level कभी कम नहीं होता|

Tuesday, 4 July 2017

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